Friday, October 30, 2009

जिजीविषा

नमस्कार !
साहित्य अदभुत क्षमताओं से परिपूर्ण होता है । ये हँसा भी सकता है और रुला भी सकता है;आशाएँ जगा भी सकता है निराशाओं से भर भी सकता है ;दिशा दे भी सकता है और भटका भी सकता है । बाबू गुलाब राय का कथन है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है । ये भी उतना ही सत्य है कि ये समाज का मार्गदर्शन भी करता है।